मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह २० ओलूंडी१ लगाय गयो है ब्रज को बासी, कब मिलि जासी हे। चंपेली री डाल कोयलिया बोले, बोलत बचन उदासी हे। गोकुल ढूँढ वृन्दावन ढूढ्यो, ढूँढी मथुरा कासी हे। रैण दिवस मछली ज्यूँ तलफ, तलफ तलफ जिवडो जासी हे। जो कोई प्रभु जी नै आण मिलावै, छूटत प्राण बचासी हे। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि जी मिल्या दुख जासी हे। ।।४८।। २१ ओलू थारी आवै ह्हो महाराज अविनासी। हो म्हाने कब रे दरस दिखासी। बिरह वियोगिन बन बन डोलूँ, करवत लूँगी कासी। निसि दिन उभी पथ निहारु, कब मोहे धीर बधासी। कृपा करो म्हारे भवन पधारो, नाही ये जिवडो जासी। मे भेद अभागण काहे को सरजी, पिया मोसूँ रहत उदासी। तुम हो हमारे अतरजामी मै (थारा) चरणा री दासी। मीराँ तो कुछ जाणत नाही, पकडी टेक निभासी। ।।४९।। इस पद की अंतिम पंक्ति सर्वथा नूतन शैली मे है,। पद की भाषा राजस्थानी प्रधान है, अत सातवी पंक्ति मे प्रयुक्त 'तुम' और 'हमारे' शब्दो के स्थान पर 'थे' और 'म्हारा' होना ही उपयुक्त प्रतीत होता है। २२ परम सनेही राम की नित ओलू री आवै। राम हमारे हम है राम के, हरि बिन कछु न सुहावै। १. याद, स्मृति।