मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ५ सइयाँ, तुम बिन नीद न आवै हो । पलक पलक मोहि जुग सो बीते, छिनि छिनि विरह जगावै हो । प्रीतम बिनि तिम जाइ न सजनी, दीपक भवन न भावै हो । फूलैरू सेझा सूल होइ लागी, जागति रैणि बिहावै हो । काँसे कहूँ कूण माने मेरी, कह्याँ न को पतियावै हो । प्रीतम पनग डस्यो कर मेरो, लहरि लहरि जिव जावै हो । दादुर मोर पपइया बोले, कोइल सबद सुणावै हो । उमगि घटा घन ऊलरि आई, बिजु चमक डरावै हो । है कोई जग में राम सनेही, जै उरि साल' मिटावै हो । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, नैणा देख्यां भावै हो ।॥८६॥† पद की नवीं पक्ति मे प्रयुक्त 'राम सनेही' प्रयोग विशेष विचार- णीय है। और भी दो एक पदो मे ऐसा प्रयोग मिलता है। पद की तीसरी पक्ति 'तिम' शब्द का प्रयोग अर्थहीन सिद्ध होता है। "फूलनसेज • भावै हो" पक्तियाँ स्वतत्र पद के रूप मे भी प्रचलित हैं। ६ थे म्हारे घर आवो जी प्रीतम प्यारा। चुन चुन कलियाँ मे सेज बनाऊँ, भोजन करूँ१ मे सारा। तुम सगुणा मे अवगुणधारी, तुम छो बगमणहारा२। मीराँ के प्रभु गिरिधर, तुम बिनि नैण दुखियारा ।॥८७॥† पदाभिव्यक्ति मे सगति का अभाव है। पाठान्तर १, घर आवो जी प्रीतम प्यारा। तन मन धन सब भेंट करूंगी, भजन करूंगी तुम्हारा। १ तय्यार करूँ, २ पुरस्कार देने वाले, क्षमा करने वाले।