मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ६१ तुम गुणवत साहिब कहिये, मो मे ओगण सारा । मै निगुणी गुण जाण्यो नाही, तुम छो बगसणहारा । मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे तुम, बिन नैण दुखियारा।† इस पाठ पर खडी बोली का प्रभाव स्पष्ट है। पाठान्तर २, म्हारे घर आज्यो प्रीतम प्यारा, तुम बिन सब जग खार। तन मन धन सब भेट करूँ, औ भजन करूँ मै थारा। तुम गुणवन्त बडे सुखसागर, मै हूँ जी औगुणहारा। मै निगुणी गुण एकौ नही, तुझ मै जी गुणसारा। मीराँ कहै प्रभु कबहि मिलोगे, बिन दरसण दुखियारा।† पहले पाठान्तर से इस पाठ का गहरा साम्य है। पाठान्तर ३, म्हॉरे डेरे¹ आज्यो जी महराज। चुणि चुणि कलियाँ सेज बिछाई, नख सिख पहर्यो साज। जनम जनम की दासी तेरी, तुम मेरे सिरताज। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, दरसण दीज्यो आज।† इस पाठ की अन्तिम पंक्ति मे और शेष सभी पाठो की अन्तिम पंक्ति मे स्पष्ट अन्तर है। इस अन्तर के बावजूद भी भावाभिव्यक्ति वही है। यह पाठ प्रथम पाठ से ही अधिक साम्य रखता है ७ आई मिलो हमकूँ प्रीतम प्यारे, हमकूँ छाँडि भये कयूँ न्यारे। बहुत दिनन की बाट निहारू, तेरे ऊपरि तन मन वारूँ १ निवास स्थान।