भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 123

वियोगाभिव्यक्ति ६५ घर आवो स्याम मोरे, मैं तो लागूँ पाय तोरे । मीराँ को सरण लीजिये, बलि बलि हारिये । ।१९५।। १५ साँइया, सुण जो अरजै हमारो । मया¹ करो महल्या पग धारो, मै खानाजाद तुम्हारी । तुम बिन प्राण दुखी दुख मोचन, सुधि बुधि सबै बिसारी । तलफ तलफ उठि उठि मग जोऊ, भई ब्याकुलता भारी । सेज सिंघ ज्यूँ लागी प्राण कूँ, निस भुजग भई भारी । दीषग मनहूँ दूहूँ दिसि लागी, बिरहिन जरत बिचारी । जब के गये अजहूँ नही आये, विलम्बे कहा मुरारी । मीराँ के प्रभु दरसन दीजो, तुम साहेब हम नारी ।।९६।। १६ हरि म्हारी सुणजो अरज म्हाराज । मै अबला बल नाहि गुसाईं, राखो अबके लाज । रावरी होइ के कणी रे जाऊ, है हरि हिवडारो साज । हम को वपु हरि देत सधार्यो, साद्यो देवन के काज । मीराँ के प्रभु और न कोई, तुम मेरे सिरताज । ।१९७।। पद की तृतीय पक्ति अर्थहीन है। इस पक्ति का शेष पद से पूर्वापर सबध भी नही बैठता। १७ कैसी रितु आई मेरी हियो लरजे, है मा । निस अधियारी कारी, बिजरी चमकै, सेज चढता² जिया डरपै, हे मा। १ दया, २ चढते हुये । ५