भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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७८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह

११

मे विरहणी बैठी जागूँ, जगत सब सोवै री आली । विरहणी बैठी रग महल मे, मोतियन की लड पोवै । इक विरहणी हम ऐसी देखी, अँसुवन की माला पोवै । तारा गिन गिन रैण बिहानी, सुख की घडी कब आवै । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल के बिछुड न जावै । ॥१२६॥

१२

दरस बिन दूखण लागै नैण । अब के तुम बिछुरे प्रभुजी, कबहूँ न पायो चैन । सबद सुणत मेरी छतियाँ काँपै, मीठे मीठे बंन । बिरह बिथा कासूँ कहूँ सजनी, बह गई करवत ऐन । कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैण । मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे, दुख मेटण सुख दैण । ॥१२७॥

पद की तीसरी और पाचवी पक्तियों का निम्नाकित पाठान्तर पाया जाता है। तीसरी पक्ति- "सबद सुणत मेरी छतिया कम्पे, मीठे लागै तुम बेन" या "सबद सुणत मेरी छतिया कम्पे, मीठे लागै बैन"। और पाँचवी पक्ति- "एकटकी पथ निहारूँ, भई छमासी रैन।"

१३

जोहने गोपाल फिरूँ, ऐसी आवत मन मे अवलोकत बारिज बदन, बिबस भई तन मं । मुरली कर लकुट लेऊँ, पीत बसन धारूँ । पछी गोप भेष मुकुट, गो झन सग चारूँ ।