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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वियोगाभिव्यक्ति ˙ ७९ हम भईं गुल काम लता, वृन्दाबन रैना। पसु पछी मरकर मुनी, श्रवण सुनत बैना। गुरुजन कठिन कानि, कासो री कहिये। मीराँ प्रभु गिरिधर मिलि, ऐसे ही रहिये। ॥१२८॥† पद की छठी और अन्तिम पक्तियो का अर्थ स्पष्ट नहीं होता। अन्तिम पंक्ति की अभिव्यक्ति से मिलन की ही भावना लक्षित होती हैं जबकि शेष पद से वियोग भावना ही स्पष्ट हो उठती है। आराध्य के अनुकूल वैष्णव परम्परा प्रभावित वेश भूषा को स्वीकार कर लेने की अभिव्यक्ति इस पद की विशेषता है। १४ हो गए श्याम दूइज के चन्दा। मधुबन जाईं भये मधुबनिया, हम पर डारो प्रेम का फंदा। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, अब तो नेह परो मदा। ॥१२९॥ इस पद से व्यक्त होती भावना 'अब तो नेह परो मदा' अन्य वियोग द्योतक और नाथ परम्परा प्रभावित पदो मे भी मिलती हैं। नाथ परम्परा प्रभावित पदो मे यह भावना बहुत ही स्पष्ट है। १५ कान्हा तेरी रे जोवत रह गई बाट। जोवत जोवत इक पग ठारी, कालिन्दी के घाट। कपटी प्रीत करी मनमोहन, या कपटी की बात। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, दे गयो ब्रज चाट। ॥१३०॥ १६ अखिया कृष्ण मिलन की प्यासी। आप तो जाय द्वारिका छाये, लोक करत मेरी हाँसी।