मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ८१ १९ हरि तुम काय कूँ प्रीति लगाई। प्रीति लगाई परम दुख दीयो, कैसी लाज न आई। गोकुल छोड़ि मथुरा के जयुँवा मे कोण बडाई। मीराँ के प्रभु गिरिधर नांगर, तुम कूँ नन्द दुहाई ॥१३४॥ २० पिया इतनी बिनती सुनो मोरी, कोई कहियो रे जाय। और न सूं रस बतियाँ करत हो, हम से रहै चित चोरी। तुम बिन मेरे और न कोई, मै सरनागत तोरी। आवन कह गए अजहूँ न आये,दिवस रहै अब थोरी। मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे, अरज करूँ करजोरी ॥१३५॥ 'दिवस रहै अब थोरी' जैसी अभिव्यक्ति इस पद की विशेषता है। "आवन कह गए अजहूँ न आए" पदाभिव्यक्ति कई अन्य पदो मे भी मिलती है। ऐसे कुछ पदो मे अवधि सूचक 'पेउर पलटिया काला केस" जैसी अभिव्यक्ति भी मिलती है, परन्तु उपर्युक्त भावना किसी भी अन्य पद मे प्राप्त नही। २१ देखो सांईया, हरि मन काठ कियो। आवन कहि गयो, अजहू न आयो, करि करि बचन गयो। खान पान सुध बुध सब बिसरी, कैसि करि मै जियों। बचन तुम्हारे तुम्ही बिसरे, मन मेरो हर लियो। मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, तुम बिन फाटत हियो ॥१३६॥ २२ पिया कूँ बता दे मेरे, तेरा गुण मानूँगी। खान पान मोहि फीको सो लागै, नैन रहे दोय छाय। ६