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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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८२ -मीराँ-बृहद्-पद-संग्रहँ बार बार मैं अरज करत हूँ, रैण दिन जाय। मीराँ के प्रभु वेग मिलोगे, तरस तरस जिय जाय ।।१३७।।† २३ पिया जी थे तो कटारी मारी। जिन को पिव परदेस बसत हैं, सो क्यूँ सोवे न्यासी। . . . .... नहीं भावत, आकूँ सदा देहारी। जैसे भवगत जत कौंचरी, सो गत भई है हमारी। बिन दरसण कल न परत है, तुम हम दिये बिसारी। मीराँ के प्रभु तुम्हरे मिलन कूँ, चरण कमल पर वारी ।।१३८।।† पदाभिव्यक्ति में संगति का अभाव है। २४ सोवत ही पलको मे मै तो, पलक लागी पल में पिऊ आये । मै जु उठी प्रभु आदर देण कूँ, जाग परी पिव ढूँढ न पाये । और सखी पिव सूत गमाये, मै जु सखी पिव जागी गमाये । आज की बात कहा कहूँ सजनी, सुपना मे हरि लेत बुलाये । वस्तु एक जब प्रेम की पकरी, अजि भये सखि मन से भाये । वो म्हारों सुने अरु गुनि है, बाजे अधिक बजाये । मीराँ कहै सत्त कर मानो, भक्ति मुक्ति फल पाये ।।१३९।।† स्वप्नानुभूति का ऐसा वर्णन इस पद की विशेषता है। पद की छठी पंक्ति का अर्थ अस्पष्ट है। २५ स्याम को सदेशो आयो, पतियाँ लिखाय माय। पतियाँ अनूप आईं, छतियाँ लगाय लीनी । अचल की दे दे ओट, ̢ऊधो पै बंधाई है।