मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 141, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ८३ बाल की जटा बनाऊँ, अग तो भभूत लाऊँ। फाडूॅ चीर करुँ गलकंथा, जोगिन बन जावूंगी। इन्द्र के नगारे बाजै, बदल की फौज आई। तोपखाना पैसखाना उतरा आया बाग मे। मथुरा उजार कीन्ही गोकुल बसाय लीन्ही। कुब्जा सो बाध्यो हेत, मीराँ गाय सुनाई है॥१४०॥† पदाभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबध का सर्वथा अभाव है तथा प्राय क्रिया पद सभी आधुनिक हिन्दी मे है।• २६ मेरे प्रीतम रामकूँ लिख भेजूँ री पाती। स्याम सदेशो कबहुँ न दीन्हो, जानिं बूझि गुझबाती। डगर बुहारुँ पथ निहारुँ, रोय रोय अखियाँ राती। तुम देख्यां बिन कल न परत है, हियो फाटत मेरी छाती। मीराँ के प्रभु कबर मिलोगे, पूरब जनम का साथी॥१४१॥ २७ मतवारो बादर आए रे, हरि को सदेशो कछु नही लाए रे। दादुर मोर पपइया बोले, कोयल सबद सुनाए रे। कारी अधियारी बिजरी चमकै, बिरहिन् अति डरपाये रे। गाजै बाजै पवन मधुरिया, मेहा अति झड लाए रे । कारी नाग बिरह अति जारे, मीराँ मन हरि भाए रे ॥१४२॥ २८ बादल देखि झरी हो श्याम, बादल देखि झरी। काली पीली घटा उमगी, बरस्यो एक घरी। जित जाऊँ तित पाणी ही पाणी, हुई सब मोम हरी। जाकाँ पिया परदेस बसत है, मीजूं बाहर खरी। मीराँ के प्रभु गिरिधर• नागर, कीज्यो प्रीत खरी॥१४३॥