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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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पृष्ठ 144

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८६ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह गुजराती में प्राप्त पद १ क्यारेँ¹ आवसे घेर कान रे, जोसिडा जोस² जुवो³ ने , दहीयो हमारी वाला दुर्बल थई केरे, थई गई थाकेली⁴ पान रे . वृन्दा ते वनमां वाले रास रच्यो छे, सहस्त्र गोपी मा एक कानरे । बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, भावे भरिया भगवान र । ॥१४८॥† पदाभिव्यक्ति में पूर्वापर संबध का निर्वाह नही हुआ है । २ कागद कोण लई जाय रे, मथुरामां लखीए, प्रीत थोडी थोडी थाय⁵ रे । प्रीत तमीने मलवा ने तलखे, ने जोशोमति अन्न न खाय रे । वृन्दाबन की कुज गलियन मे, रोता रजनी जाय रे । मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरण कमल चित चोर रे ॥१४९॥† अन्तिम पंक्ति का शेष पद से समन्वय नही होता । ३ कही जइ⁶ करूं रे पोकार, कारी मुनी धावे लागे थे, मे कही जई करूं पोकार रे । पिऊ जी हमारो पारधि भयो थे, मै तो भइ हरिणी शिकार रे । दूर से थी आइ गोली लग गई,शीरू थे,नीकर गयी पारम पार रे । प्रेम नी कटारी पुने⁷ खेच कर मारी था, थई गई हाल बेहाल रे । मीराँ के प्रभु गिरिधरना गुण, हो गई पारम पार रे ॥१५०॥† १ कब, २ पंचाग, ३ देखी, ४ सूखा हुआ, ५ होती है, ६ जाकर, ७ मुझको ।

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