भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वियोगाभिव्यक्ति ८७ ४ शामले मल्या त बिसारी, ओधव ने वाले शामले मेल्या ते बिसारी । प्रीत करी ने पालव१ पकडो वाला, प्रेम नी कटारी मुने मारी । गोकुल थी मथुरा मै गयो छो वा'ला, कुब्जा सोलागी छै तस्ली२ । मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरण कमल बलिहारी ।।१५१।।† ५ ब्रजमा कयम रेवाशे३ ओधव ना वा'ला, ब्रज मा कयम रेवाशे । आठ दाहडानी४ अवध करी ने गया छो, वा'ला खटमास थय छेहरिने । वृन्दाबन की कुजगलिगाँ वाला, बैठा छे मुख मोरली धरी ने । मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण, वा'ला अमोरह्या छे आसडा भरी ने । ।।१५२।।† पदाभिव्यक्ति मे विरोधाभास स्पष्ट है । ६ आव जो म्हॉरे नेडे५, ओधव न वा'ला, आव जो म्हारे नैडे । म्हॉरे आगणिये आबो मेर्यो, वा'ला कानुडो आवीने सायॉ बैडे । अमो जल जमुना भरवा गया ता, वाला कानुडो पड्यो छे म्हारी कैड़े । मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, वा'ला हरि मलवा मन हेरे ।।१५३।।† पद की तीसरी पंक्ति शेष पद से सर्वथा भिन्न पडती है । पद मे पूर्वापर सम्बन्धका भी सर्वथा अभाव है । ७ कांनी भावे देखन जाऊं, श्यामलो वेरागी भयो रे । कोरी मटकी मां नही जमाऊं, गुबालेन हो कर जावूँरे । १ आँचल, २ नेह, ३ रहा जायगा, ४ दिनकी, ५ नजदीक, पास।