मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 146, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें८८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह गोरे गोरे अंग पर भभूत लगावूूँ, जोगण होकर जाऊ रे। मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर नागर, श्याम सुदर पार पावूँ रे ।। १५४।।† इस तरह की अभिव्यक्ति का यह एक ही पद प्राप्त है । ८ गोविन्दा ने देश ओघ मुने लेई, जारे गोविन्दा ने देश । मने रे मोहन जी ए मेली, १ रे बिसारी, करडूूँ मोरी करम की रेख । हार तजुगी, शणगार तजुगी, तजुगी काजल की रेख । चीर ने फाडी वा'ला कफनी पेरुगी, लेऊगी जोगन का वेश । गोकुल तजुगी मे मथुरा तजुगी, तजुगी मे ब्रज केरी देश । मीराँबाई के प्रभु गिरधरना गुण, चरण कमल चित्त सग रहेश । ।।१५५।।† पदाभिव्यक्ति पर नाथ पथ का और भाषा पर खडी बोली का प्रभाव स्पष्ट हैं। ९ आवो ने सलुणा म्हारा मीठडा मोहन, आँख लडी माँ तमने राखूं रे । हरि जेरे जोइये ते तमने आणी,आणी आपुँ २ मीठाई मेवा तमने खावा रे । ऊची ऊंची मेडी स़ाहेबा अजब झरुखा, झरुखे चढ़ी चढी फारबे रे । चुन चुन कलिया वा'ली सेज बिछावुँ,भमर पलग पर सुख नाखुँ वारी रे। मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, तारा चरण कमल मां चित राखूं रे। ।।१५६।।† १० मारा प्राण पातलिया वाहेला आवो रे, तमरे विनाहूँ तो जनम जोगण छूूँ। नाभी कमल की सुरता रे चाली, जई ने तखत पर रास रसीला रे। १ रखी, २ दूँ।