मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९० मीराँ बृहद्-पद संग्रह १३ ब्रजमा केम रेवाशे, ओधवना वा'ला, ब्रज मा केम रेवाशे । जेरे डाडा जीवन गया छो वा'ला, दु खडा काने कहेवागे । बलवात थई ने वादी शूँ मूको, वा'ला, वरद तमारू जाशे । मीराँ बाई के प्रभु गिरधर ना गुण, वा'ला, गोपिका अरज काशे । ।।१६०।।† पद स० ५ तथा उपर्युक्त पद की पचम पक्तियो में साम्य हे, परन्तु शेष पद सर्वथा भिन्न पडता हे । विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद पंजाबी १ सावरे दी भालन भाये, सानू प्रेम दी कटारिया । सखी पूछे दोऊ चारे, व्याकुल क्यों मैया नारे । रग के रगीले मोंसे दृग भर मारिया । व्याकुल बेहाल भैयो, सुध बुध भूल गैया । अजहूँ न आये श्याम, कुंज बिहारिया । यमुना की घाटी बाटी, असो तेरी चाल पछाती । बसियां बजावी कान्हा, मैया मत वारिया । मीराँ बाई प्रेम पाया, गिरधर लाल ध्याया । तू तो मेरो प्रभु जी प्यारा, दासी हो तिहारियां ।।१६१।।† पद की आठवी पंक्ति से अन्योक्ति ही स्पष्ट होती है। भाषा क आधार पर भी पद की प्रामाणिकता संदिग्ध ही है ।