मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति ६७ पेया नाग छोडियो जी, छोडो मीराँ महैल । हिवडे हार हिडोलिया जी, थे जाणो रघुनाथ । दोनो पाठान्तरो मे कुछ शब्दो का ही अन्तर है । इन पदो मे एक विचारणीय अभिव्यक्ति यह है कि मीराँ चित्तौड़ का त्याग करती है मेडता जाने के उद्देश्य से ही तथापि चली जाती है तीर्थ-यात्रा हेतु । "मुरड चली राठोड" जैसी राणा की धारणा से भी आभासित होता है कि मीराँ नाराज होकर गृह-त्याग कर अपने पीहर "राठोड़" जा रही है। "डॉवो तो मैल्यो मेडतो पेलाँ पोखर जाय" या "सूधा द्वारका जाय।" जैसी अभिव्यक्तियो का विश्लेषण अद्यावधि प्राप्त वृतान्त क आधार पर करना सम्भव नही । (देखे, "मीराँ, एक अध्ययन") । ५ गढ से तो मीराँ बाई उतरी, करवा¹ लीना जी साथ । डॉवो तो छोड़्यो मीराँ मेडतो, पुस्कर न्हावा जाय । मेरो मन लाग्यो हर के नाम, रहस्या साधा के साथ । राणा जी ओठी² भेज्याँ, दीजो मीराँ बाई रे हाथ । घर की मानन³ अस्तरी, मुरड⁴ चली राठोड । लाजै पीहर सासरो, लाजै तेरो सो परवार , लाजै मीराँ जी थारा मायड बाप, चोथो वंश राठोड । मीराँ बाई कागद⁵ भेज्याँ, दीजो राणा जी रे हाथ । राणा जी समझ्यो नही, ले लाती बैकुन्ठा । सिसोदियो समझ्यो नही, ले जाती बैकुन्ठा । बागाँ मे बोली कोयलियाँ, बन मे दादुर मोर ।
१ मिट्टी का बना हुआ एक छोटा सा पात्र जो (पानी से भर कर) पूजा करने, सती होने या ऐसे किसी शुभ अवसर पर व्यवहृत होता है। २ पत्र, ३ बनाने वाली, ४ नाराज होकर, ५ पत्र । ७