मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 155, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह डावो छोड़यो मेडतो कोई सूधा१ द्वारका जाय । राणा जी साड्यो भेजिया जी, पाछा लावो घेर । घर की नार इस्तरी चाली, चाली छे मुड राठोर । लाजै पीहर सासरो जी, लाजै भाय र बाप । लाजै दूदा जी रो मेडतो जी, कोई चौथी गढ चितौड । राणा जी विष का प्याला भेजिया जी द्यो मीराँ के हाथ । कर चरणामृत पी गयाँ जी, आप जानो दीनानाथ । पेया२ नाग छोडिया जी, छाडो मीरा के महल । हिवडे३ हार हिडोलिया,४ कोइ तुम जाणो रघुनाथ ॥१६७॥ “दूदा जी रो मेडतो” अभिव्यक्ति विशेष महत्वपूर्ण है। राणा द्वारा सांप भेजे जाने का कथानक यहाँ दूसरे ही रूप मे दिया गया है। आराध्य के प्रति “मदन गोपाल” सम्बोधन भी इस पद की विशेषता है। इस पद का भी पहले तीनो पदो से गहरा साम्य है। पाठान्तर १ मै तो सुमर्या छै मदन गोपाल, राणो जी म्हारो काईं करसी । मीराँ बैठी महल मे जी छापा तिलक लगाय । आया राणा जी महल मे जी,कोप करियो छै मन माय । मीराँ महैलाँ से उतर्या जी ऊटा कसिया भार । डावो छोडगो मेड़तो कोई सूधा द्वारका जाय । राणा जी साड् यो भेजियो जी पाछा ल्यावो दौड । घर की नार इस्तरी चाली, चाली मुड राठौड । लाजै पीहर सासरो जी, लाजै माय र बाप । लाजै दूदा जी रो मेडतो जी लाजै गढ चितौड । विष का प्याला भेजिया जी, द्यो मीराँ के हाथ । कर चरणामृत पी गया जी, आप जाणो दीनानाथ । १ सीधे, २ पिटारी, ३ हृदय पर, ४ झूला लिया ।