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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१०८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह इस पद का एक और भी पहलू विशेष विचारणीय है। पदाभिव्यक्ति से स्पष्ट है कि मीराँ ने गृह-त्याग कर दिया है किन्तु अब भी राणा को मीराँ के प्रति उपालंभ है। अब भी राणा का मन मीराँ के प्रति कठोर भावनाओ से पूर्ण है। मीराँ कराह उठती है कि जहर पीने पर और घर छोड देने पर भी राणा का व्यवहार उनके प्रति कठोर है। गृह-त्याग के बाद भी मीराँ के समक्ष राणा के बैर का प्रश्न ही क्योकर उठ सका, प्राप्त वृतान्त यहाँ सर्वथा मौन है। अस्तु, स्पष्ट ही है कि पद को प्रामाणिक मान लेने पर पदाभिव्यक्ति से व्यक्त होती घटनाओ पर खोज होना नितान्त आवश्यक हो जाता है। १६ सिसोद्या राणो, प्यालो म्हाँने क्यूँ रे पठायो। भली बुरी तो मै नहि कीन्ही राणा क्यूँ है रिसायो। थाने म्होने देह दिवी है ज्याँ रो हरि गुण गायो। कनक कटोरे लै विष घाल्यो दयाराम भडो लायो। अठी उठी१ तो मै देख्यो कर चरणामृत पायो। आज कल की मै नाही राणा जद यह ब्राह्माण्ड छायो। मेडतिया घर जन्म लियो है मीराँ नाम कहायो। प्रहलाद की प्रतिज्ञा राखी खभ फाड बेगो धायो। मीराँ कहे प्रभु गिरिधर नागर, जन को बिडद बढायो।।१७९।।† पदाभिव्यक्ति मे संगति का अभाव है। "आज काल की मै नही" जैसी अभिव्यक्ति के तुरन्त बाद ही "मेडतिया घर जन्म लियो है" जैसी अभिव्यक्ति अमान्य ही हो उठती है। पद का प्रारम्भ होता है राणा के प्रति सम्बोधन से और अन्त होता है कृष्ण की लीलाओ के वर्णन से, यहाँ भी पूर्वापर सबंध की असबद्धता स्पष्ट हो उठती है। पदाभिव्यक्ति से व्यक्त होती बाते विशेष विचारणीय है। पदाभिव्यक्ति के अनुसार राणा की आज्ञा से मीराँ तक विष का प्याला ले जाने वाला व्यक्ति का नाम दयाराम पांडे था। परन्तु मुंशी १ यहाँ वहाँ—चारो तरफ।