भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 176

संघर्षाभिव्यक्ति ११७ २५ म्हारो मनडो राजी राजा जी। काइ करैसा म्हारो दुरजन पुरजन। काई करैला झूठा पाजी जी। काई करैला म्हांरो राजा राणी। काई करैला मुल्ला काजी जी। राम प्रीतम सूं हिलूमिल खेलूं। परत न छोड़ू बाजी जी । मोराँ के प्रभु प्रात पुरबली। तुम मत जाणो आजी१ जी ॥ १८८॥ सम्पूर्ण पद विशेष विचारणीय है। "मुँल्ला काजी" आदि वर्णन स पद की प्रामाणिकता विशेष संदिग्ध है। पद मे प्रथम पक्ति को छोडकर हर जगह "करैला" क्रिया का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ है, करेगे। केवल प्रथम पक्ति मे यह 'करैला' 'करैसा' मे परिवर्तित हो गया है। सम्पूर्ण पद की सगति देखते हुए "करैला" होना ही अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। २६ गिरधर म्हारा साचा पति छै, मै गिरधर री दासी हे माय राणो जी म्हासू रूस रह्यो छै, कडा वचन निकासै हे माय। राणो कहै सोरा कन माना म्हे, साध दुवारै नित आसी है माय। मीराँ के प्रभु सेज चढै जब, ठाढी करै खवासी हे माय ॥१८६॥ पदाभिव्यक्ति विशेष विचारणीय है। २७ गिरधर म्हारे मन भाया मोरी माय, राणो जी म्हांरे दाय न आवै। राणा जी म्हासे रूस रहा छै, कूडा बचन सुनाया। १ सम्भवतः इसका भावार्थ "इस समय" हो सकता है।