भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१२४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह लोक लाज कुल काण¹ जगत की, दइ बदाय जस पाणी । अपने घर का परदा कर ले, मै अबला बौराणी । तरकस तीर लाग्यो मेरे हिय रे, गरक गयो सनकाणी । सब संतन पर तन मन बारो, चरण कवल लपटाणी । मीराँ के प्रभु राखि लईं है, दासी अपनी जाणी ॥२०१॥ पाठान्तर १, राणा जी जहर दियो हम जानी । जानबूझ चरणामृत सुन के पियो, नही बौराणी । जिन हरी मेरी नाव निवेरियो, छान्यो दूध अरु पानी । कचन असत कसौटी जैसे, तन रह्यो बारह बानी । राणा कोट करु न्योछावर, मै हरि हाथ बिकानी । मीराँ प्रभु गिरिधर नागर, के चरण कवल लिपटानी । पाठान्तर २, राणा जी जहर दियो हम जानी । अपने कुल को परदा कर ले, मै अबला बौराणी । राणा जी परधान पठायो, सुन जो जी थे राणी । जो साधन को सग निबरो, करा तुमे पटराणी । हथलेवी राणा सग जुड़ियो, गिरधर घर पटराणी । क्रोड भूप साधन पर वारुं, जिन की सरण रहाणी । मीराँ को पति एक रमैया, चरण कवल लपटानी । पाठान्तर ३, जहर दियो म्हे जाणी । राणा जी थे तो अपने कुल को परदो कर ले मै अबला बौराणी ।


१ मर्यादा ।