भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१२८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह सम्पूर्ण पद में मीराँ का नाम या ऐसी कोई अभिव्यक्ति, जिसव आधार पर पद मीराँ रचित होना स्पष्ट हो सके, नही है । ६ यो तो रग धत्ता लाग्यो ए माय । पिया पियाला अमर रस का, चढ गई धूप घुमाय । या तो अमल म्हारे कबहुँ न ऊतरे, कोटि करो उपाय । सांप पिटारो राणा जी भेज्यो, द्यो मेडतणी गल डार । हँस हँस मीराँ कठ लैगायो, यो तो म्हारे नौसर हार । विष को प्यालो राणा जी भेज्यो, द्यो मेड़तणी प्याय । कर चरणामृत पी गई रे, गुण गोविन्दरा गाय । पिया पियाला नाम का रे, और न रग सुहाय । मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, काची रंग उड जाय । ॥२०५॥† प्रथम पक्ति का निम्नाकित पाठान्तर भी मिलता है — “यो तो रग म्हारे श्यामसुन्दर को जनम जनम नहि जाय ।” पाठान्तर १, किण विध कहूँ, कहण नही आवै, रह्यो घुमाय घुमाय । गुरु प्रताप साध री सगत, हरिजन मिलिया आय । किरपा करो तो प्रभु जी ऐसी कीज्यो, दूजी नाही सुहाय । राणा जी विषरा प्याला भेज्यो, म्हे सिर ल्यो चढाय । चरणामृत को जब लीनो पीगी प्रेम अघाय । पीवत ही अति चढी खुमारी, रह गई कहत सुमाय । जिन मीराँ की पनवारी कीन्ही, पूरब जनम के भाय । पाठान्तर २, किंण विध कहूँ कहण नही आवै, चढ्यो घुमाय । गुरु प्रताप साध री सगत, हरिजन मिलिया आय ।