भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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संघ गी अभिव्यक्ति १२७ “मीराँ ने ˙ ˙ ˙ न सारे” जैसी तीन पक्तियाँ कथोपकथन शैली मे लिखी गयी है । शेष सम्पूर्ण पद वर्णनात्मक शैली मे है । अन्तिम पक्ति अर्थ हीन है । ४ राणो म्हांरो काई करिहै, मीराँ छोड दई कुल लाज । विष को प्यालो राणाजी ने भेज्यो, मीराँ मारन काज । हँस के मीरा पाय गई है, प्रभु परसाद पर राग । डब्बो खोल मीराँ जब देख्यो, हैं गये सालिगराम । जै जै धुनि सब सत सभा भई, कृपा करि घनश्याम । सजि सिगार पग बाँध घूँघरू, दोऊ पर देती ताल । ठाकुर आगे नृत्य करत ही, गावत श्री गोपाल । साध हमारे हम साधन के, साध हमारे जीवन । साधुन मीराँ मिलि जा रही है, जिमि माखन मे घीव ॥२०३॥† प्रथम पक्ति के अतिरिक्त जो कथनोपकथन की शैली मे है, सम्पूर्ण पद वर्णनात्मक शैली मे है । ५ मेरो मन हरिसूँ जोर्यो, हरि सूं जोर्यो सकल सूं तोर्यो । मेरी प्रीति निरन्तर हरि सूं, ज्यूँ खेलत बाजीगर गोर्यो । जब मै चली साध के दरसण कूँ, तब राणा मारण को दोर्यो । जहर देन की घात विचारी, निरमल जल मे ले विष घोर्यो । जब चरणोदक सुण्यो सखणा१, राम भरोसे मुखमे ढोर्यो । नाचन लागी तब घूंघट कैसो, लोक लाज तिणका ज्यूँ तोर्यो । नेक बदी हूँ सिर पर धारी, मन हस्ती अंकुस दे मार्यो । प्रकट निसान बजाय चली मै, राणा राव सकल जग जोर्यो । ॥२०४॥† १ कानो से ।