मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति १३१ “सूल सेज” भेजे जाने की कथा का वर्णन इस पद की विशेषता है। सम्पूर्ण पद की शैली वर्णनात्मक है। अतः यह कहा जा सकता है कि किसी अन्य व्यक्ति ने मीराँ की प्रशंसा मे यह पद लिखा है। खड़ी बोली में प्राप्त पद १ तेरा मेरा जिवडा यक कैसे होय राम। हमने कहा सुरझावन राणा, तुम जाने मुरझाय राम। हमने कहा निर्मोहित रहना, तुमतो जान मोहाय राम। तेल जले तो जलती है बाती, दिवरा झलमल सोय राम। जल गया तेल रे बुझ गई बाती, लच्चर लच्चर होय राम। हमने कहा आंखिन का देखा, तुम कानों सुनि सोय राम। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, होनहार सो होय राम। ॥२०९॥† पदाभिव्यक्ति मे संगति का अभाव है। गुजराती में प्राप्त पद १ आदि वैरागिण हुँ राणा जी मै आदि वैरागिण हुँ। मीराँ बाघ घूघरा रे, हाथ लिये करतार। अमोरे गिरधर आगे नाची सुँरे, गुनगाई सुँ रे गोपाल। विषना प्याला राना मोकलियो रे, दीज्यो मीराँ के हाथ। कर चरणामृत पी गया रे, अमोरे बासी श्री रघुनाथ ॥२१०॥† २ आज मोरे साधु जन नो संगेरे, राणा, मारा भाग्य भला रे। साधु जननो सग जो करिये, पिया जो चढे ते चौगुणो रंग रे। साक्ट जन नो सग न करिये, पिया जी पाड़े भजन मे भंग रे।