भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१३२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह अड़सठ तीरथ सतो ने चरणे, पिया जी, कोटि काशी ने कोटि गंगरे । निन्दा करसे तो नरक कुंड मा जशे, पिया जी, थशे आधला अपगरे । मीराँ कहै गिरधर ना गुण गायो, पिया जी, सतोनी रझमा शीरसगे रे । ॥२११॥ ३ मै तो छाडी छाडी कुल की लाज, रगीलो राणा काई करसे माणा राज । पाव मे बाधूगी घुँघरा, हाथ मे लेऊंगी सितार । हरि के चरणो आगे नाचती रे, काई रीझेगो करतार । जहेर को प्यालो राणा जी भेज्यो, धरियो मीराँबाई हाथ । करि चरणामृत पी गई रे श्री ठाकुर को परसाद । राणा जी ये रीस करी भेज्यो, झेरी नाग असार । पकड गले बिच डालियो, कांई हो गयो चन्दन हार । मीराँ को गिरधारी मिलिया, जनम जनम भरतार । मै तो दासी जनम जनम की, कृष्ण कत सरदार ॥२१२॥† ४ गोविन्दो प्राणो अमारो रे, मने जग लाग्यो खारो रे । गोविन्द । मने मारो राम जी भावे रे, बीजो मारे नजरो न आवै रे । ,, मीराँ बाई माँ महल मा रे, हरि संतन नो वास । ,, कपटी थी हरि दूर बसे, मारा सतन केरी पास । ,, राणा जी कागज मोकले रे, दो राणी मीराँ ने हाथ । ,, साधुनी संगत छोड़ि दो, तमो वसो नी हमारे साथ । ,, मीराँ बाई कागज मोकले रे, दीजो राणा जी ने हाथ । ,, राज पाट तमे छोड़ी राणा जी, वसो साधु ने साथ । ,, विष नो प्यालो राणो मोकलिया रे, पीजो मीराँ ने हाथ । ,, अमृत जानी मीरा पी, जे ने सहाय श्री विश्वनाथ । ,, साढ़वाला साढ़ शनगारजे रे,-जावुं सो सो रे कोश । ,,