भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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मिलन और बधाई १३७ सपत¹ दीप की दे परकरमा, हरि हरी मे रहौ समाय । तीन लोक झोली मे डारै, धरही ती कियो निपान² । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, रहौ चरण लपटाय ॥२१८॥ प्रथम पंक्ति मे प्रयुक्त 'राम स्नेही' प्रयोग विचारणीय है। पद की तृतीय पंक्ति से सतमत की भावना ही स्पष्ट हो उठती है जब कि शेष पद मे वैष्णव प्रभाव ही लक्षित होता है। यह भी विचारणीय प्रश्न है। ५ गिरधर आवणा है ऊदाँबाई लेजडली संवार । आवण री बिरिया³ भई जी, अब महलां ढोल्यो⁴ ढार । अँतर⁵ सुगंध मिलाय के जी, घी भर दिवला बार । जाई जुही केतकी जी, चपा कली सुधार । पलकां सू करां पावडाजी, अंचला सू मग झार । गिरधर म्हारो परम स्नेही गिरधर उनकी नार ॥ २१९ ॥ निम्नांकित दो पंक्तियाँ और भी मिलती है . पुष्पन सो झोली भरी, रुचि रुचि सेज संवारि । चारुं दिस फिरती फिरै, ऊदाँ चमेली लार⁶ । अद्यावधि प्राप्त पदों से मीराँ के प्रति ऊदाँ का विरोध भाव ही लक्षित होता रहा है। यही एक पद भक्ति के क्षेत्र मे मीराँ और ऊदाँ की निकटता का द्योतक है। ६ म्हांरे आज रंगीली रात, मनडरा म्हरम आइया । या छिब निरखण सुगन⁷ मनावण, अतर सुगध लगावण । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मन अंछ्या⁸ बर पावण । ॥२२०॥ १ सप्त, २ नाप दिया, ३ समय, ४ अतिथि अभ्यागत के लिये बनाए गए छोटे पलग, ५ इत्र, ६ पीछे, ७ सगुण, ८ इच्छित ।