मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमिलन और बधाई १४१ ब्रज भाषा में प्राप्त पद १ बदला रे तू जल भरि ले आयो। छोटी छोटी बूदन बरसन लागी, कोयल सबद सुनायो। गाजै बाजै पवन मधुरिया, अबर बदरा छायो। सज सवारी पिय घर आये, हिल्मिल मगल गायो। मीरॉ के प्रभु हरि अविनासी, भाग भलो जिन पायो। ॥२२६॥ २ नन्द नन्दन बिलमाई, बदरा ने घेरी माई। इत घन लरजे, उत घन गरजे चमकत बिज्जु सवाई। उमड़ घुमड चहुँ दिसी से आया, पवन चलै पुरवाई। दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनाई। मीरॉ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल चितलाई। ॥२२७॥ पाठान्तर १, चित नन्दन बिलमाई, बदराने घेरी भाई। इत घन लरजै, उत घन गरजै, चमकत बिज्जु सवाई। उमड़ घुमड चहुँ दिस से आया, पवन चलै पुरवाई। विरहनि तेरी प्राण डरत है, दाधी बेल सिचाई। मीराँ के प्रभु दर्शन दीजै, प्राण रखौ सरणाई। तृतीय पंक्ति के उत्तरार्द्ध का निम्नांकित पाठान्तर भी प्राप्त है। 'माण रहत मोकू।' एक ही पद के दो पाठान्तर दो विभिन्न भावो के द्योतक हैं, यह विचारणीय ह। पाठान्तर की तृतीय पंक्ति का अर्थ स्पष्ट नही होता।