मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह ३ मेहा बरसवो करे रे, आज तो रमियो मेरे घर रे । नान्ही नान्ही बूंद मेघ घन् बरसे, सूखे सखर भरे रे । बहुत दिना पै पीतम पायो, बिछुरन को मोहि डर रे । मीराँ कहै अति नेह जुडायो, मै लियो पुरबालो बर रे ।॥२२८॥ पद की द्वितीय पक्ति में 'मेघ' और 'घन' दोनो पर्यायवाची शब्दो के प्रयोग से पुनरुक्ति हुई है। ४ देखी बरषा की सरसाई, मेरे पिया जी के मन आई । नान्ही नान्ही बूंदैन बरसन लाग्यो, दामिनी दमके झरलाई । स्याम घटा उमडी चहुँ दिसी सो, बोलत मोर सुहाई । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर आणन्द मगल गाई । ॥२२९॥ ५ रग भरी रग भरी, रग सूं भरी री, होली आई प्यारी रग सूं भरी री । उडत गुलाल लाल भये बाहर, पिचकारिन की लगी झरी री । चोवा चन्दन और अरगजा, केसर गागर भरी धरी री । मीराँ कहै प्रभु गिरधर नागर, चेरी होय पायन मे परी री ॥२३०॥ ६ बसो मोरे नैनन मे नन्दलाल । मोहनि मूरत सावरि सूरत, नैणा बने विसाल । अधर सुधारस मुरलि राजति, उर बैजन्ती माल ।