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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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मिलन और बधाई १४३ छुद्र घटिका कटि तट सोभित, नूपुर शब्द रसाल । मीराँ प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वच्छल गोपाल ॥२३१॥ पदाभिव्यक्ति से बालकृष्ण का वर्णन ही स्पष्ट होता है, जो मुग्धा नारी के लिय सगत नही प्रतीत होता। देखे 'मीरा', एक अध्ययन।' 'बृहदाग रत्नाकर' मे निम्नाकित पद प्राप्त है। दोनो पदो मे इस गहरे साम्य के कारण कहा जा सकता है कि 'दास गोपाल' का ही पद मीराँ के नाम पर प्रचलित हो गया है :- बसो मोरे नैनन मे नन्दलाल । सावरी सूरत माधुरी मूरत, राजिव नयन विसाल । मोर मुकुट मकराकृत कुडल, अरुण तिलक दिये भाल । अधरन बंसी कर मे लकुटी, कौस्तुभ मणि वनमाल । बाजूबन्द आभूषण मुदर, नुपूर शब्द रसाल । दास गोपाल मदन मोहन, पिय भक्तन के प्रतिपाल । (पद ४८५, पृष्ठ १२३,) 'दास गोपाल' के पद की भाषा साहित्यिक है जबकि मीराँ के नाम पर प्रचलित पद की भाषा सरल है। सम्भव है कि गेय परम्परा ही इसका कारण हो। उपर्युक्त दोनो पद से कुछ साम्य रखता हुआ एक और भी निम्ना- कित पद 'बृहद्राग रत्नाकर' मे मिलता है। “बसो मेरे नयनन मे दोऊ चद। गौर बरण बृषभानु नदिनी, श्याम वरण नन्दनन्द। गोकुल रहे लुभाय रूप मे, निरखत आनन्द कद। जयश्री भट्ट युगल रूप बडो, क्यो छूटै दृढ फंद। (पद ४८६, पृष्ठ १२४) इस पद की प्रथम पक्ति और उपर्युक्त अन्य दोनो पदो की प्रथम पक्ति मे ही गहरा साम्य है। यद्यपि शेष पद सर्वथा भिन्न है।