मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ७ जोसीड़ा ने लाख बधाई, अब घर आये स्याम। आजि आनन्द उमंगि भयो है, जीव लहै सुखधाम। पांच सखि मिली, पीव परसि के, आनन्द ठासू ठाम। बिसर गई दु ख निरखि पिया कूँ, सुफल मनोरथ काम। मीराँ के सुख सागर स्वामी, भवन गवन कियो राम ॥२३२॥† पाठान्तर १, जोसीड़ा ने लाख बधाई, आज घर आये स्याम। आजि आनन्द उमगि भयो अति, जीव लहै सुखधाम। पच सखी मिलि परसि पिया कूँ, आनन्द आठूँ जाम। विसर गई दुख निरखि पिया कूं सुफल मनोरथ काम। मीराँ के प्रभु सुख के सागर, भवन गवन कियो, राम। यह पद ‘राम सनेही’ गुटके से उद्धृत है। बहुत सम्भव है कि ‘राम सनेही’ सम्प्रदाय का ही पद मीराँ के नाम पर चल पड़ा हो। ‘राम सनेही’ प्रयोगयुक्त एक पद (सं० ४) राजस्थानी मे भी मिलता है। ८ पायो जी मै तो राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा करि अपनायो। जनम जनम की पूँजी पाई, जग मे सभी खोवायो। खरचै नहि कोई चोर न लेवै, दिन दिन बढ़त सवायो। सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरख हरख जस पायो ॥२३३॥ सम्पूर्ण पद की भाषा विशुद्ध ब्रज भाषा है। मात्र एक शब्द ‘म्हारे’ ठेठ राजस्थानी शब्द है। पाठान्तर मे इस शब्द का प्रयोग नही मिलता।