मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 203, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ेंमिलन और बधाई १४५ पाठान्तर १, राम रतन धन पायो, मैया मै तो राम रतन धन पायो । खरचै ना खूटै, वाकू चोर न लुटै, दिन दिन होत सवायो । नीर न डूबै वाकूँ अगिन न जालै, धरनी धर्यो न समायो । नाँव को नाँव भजन की बतियाँ, भवसागर से तार्यो । मीराँ बाई प्रभु गिरधर सरणै, चरण कमल चित लायो । उपर्युक्त पद के दोनो पाठो से सतंमत का प्रभाव स्पष्ट हो जाता है। ९ माई मै तो लियो रमैयो मोल । कोई कहै छानी¹, कोई कहै चोरी, लियो है बजता ढोल । कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, लियो है अखी खोल । कोई कहै हल्का, कोई कहै मँहगा, लियो है तराजू तोल । तनका गहना मै सब कुछ दीन्हा, दियो है बाजूबन्द खोल । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, पूरब जनम का कोल ॥२३४॥ उपर्युक्त पाठ की भाषा राजस्थानी की ओर झुकी हुई है। पद की द्वितीय पंक्ति मे प्रयुक्त ‘चोरी’ शब्द के बदले ‘चोडे’ का भी प्रयोग मिलता है जो अर्थ सगति के विचार से अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। ‘चोडे’ का अर्थ हे सब की जानकारी मे । शेष पद से चतुर्थ पंक्ति भिन्न पडती है, इतना ही नही यह पंक्ति ज्यो की त्यों अन्य पदो मे भी मिल जाती है। इसी तरह, अन्तिम पक्ति का द्वितीयाश भी ज्यो का त्यो अन्य पदो मे प्राप्त है। १ छिपा कर । ०