मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमर्पण द्योतक पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ मीराँ रग लाग्यो हो नाम हरी, और रंग अटकि परी। गिरधर गास्यां सती न होस्या, मन मोह्यो घण नामी। जेठ बहू नही राणा जी, थे सेवक हू स्वामी। चोरी करा नही जीव सतावा, कांई करेगी म्हाको कोई। गज सूँ उतरि गधे नही चढ़स्या, या तो बात न होई। चूडो तिलक दोवडो अस माला, सील वरत सिणगार। और वस्तु रति नही मोहै भावै कोई निन्दो, म्हो तो गोविन्द जी रा गास्या। जिण मारग वे संत गया छै, जी' मारग म्हे जास्या। राज करता नरक पडता, भोगी जो रै लीया। जोग करता मुकति पहुता, जोगी जुग जुग जीया। गिरधर धनी धनी² मेरे गिरधर, मात पिता सुत भाई। थे थाके मै म्हाके राणा जी, यूँ कहै मीराँ बाई। ॥२३८॥ पद के अन्तिम चरण मे "गिरधर धनी, धनी मेरे गिरधर " के बदले "गिरधर म्हांरा मै गिरधर की" अभिव्यक्ति भी मिलती है, जो अधिक उपयुक्त प्रतीत होती है। पाठान्तर १, मीराँ रग लाग्यो नाव हरी, और रंग अटकि परी। गिरधर भजस्या सती ये न होस्यां, मन मोह्यो गिरधारी। १ वही, २ स्वामी।