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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१५२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह जेठ बहू को नाती नही छै, राणा थे सेवक म्हे स्वामी। चूडो देवडो तिलक ज माला, सील बरत सो भारी। चोरी करा नही जीव सतावा, काई केरैलो म्हारो कोई। गज चढ गीदड न चढा हो राणा, ये तो बाता सरी। गिरधर धणी गोविन्द कडूं वो, साध सत म्हारा धरी। थे थाके म्हे म्हाके हो राणा जी, यूँ कहै मीराँ खरी। पाठान्तर २, मीराँ लागो रग हरी, और रग सब अटक परी। चूडो म्हारे तिलक अस माला, सील बरत सिण गारो। और सिगार म्हारे दाय१ न आवै, यो गुर ग्यान हमारो। कोई निन्दो कोई बिन्दो, म्हे तो गुण गोविन्द का गास्या। जिण मारग म्हारा साध पधारे, उन मारग म्हे जास्या। चोरी न करस्या, जीव न सतास्या, काई करसी म्हारो कोई। गज से उतर कर खर नही चढ़स्या, ये तो बात न होई। कही कही निम्नाकित कुछ पक्तियाँ उपर्युक्त पद के साथ और भी मिलती है। सती न होस्या गिरधर गास्यां, म्हारो मन मोहो घण नामी। जेठ बहू को नातो राणो जी, हू सेवक थे स्वामी। गिरधर कंत गिरधर धनी म्हारे, मात पिता वीर भाई। थे थारे मै म्हारे राणा जी, यूँ कहै मीराँ बाई। उपर्युक्त पद के तीनो ही पाठो मे मीराँ का सती होने से इन्कार करना सुस्पष्ट हो जाता है। राजपूती परम्परा के आधार पर यह आश्चर्यजनक प्रतीत होता है। पद के ही आधार पर यह भी मालूम होता है कि मीराँ को सती होने का आदेश करने वाले स्वय राणा ही थे। १ पसन्द।