भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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समर्पण द्योतक पद १५३ इन राणा से मीराँ का क्या सम्बन्ध था, यह सर्वथा अनिश्चित है । बहुत सम्भव हो कि ये राणा जेठ ही रह हो । सम्भव है कि मीराँ अपने ही प्रति 'जेठ बहू' (प्रथम पाठ मे) की अभिव्यक्ति करती हैं अर्थात् सब मे बडी बहू । “यूँ कहै मीराँ बाईं” जैसी टेक भी विचारणीय है । सतमत का प्रभाव इस पद से भी स्पष्ट हो उठता है । “जिग मारग म्है जास्या” जैसी अभिव्यक्ति ‘गुरु’ और उनके प्रदर्शित मार्ग के प्रति मीराँ के विशेष अनुराग को ही सिद्ध करती है । २ चाला वाही देस, चाला वाही देस । कहो कुसम्भी सारी रगावा, कहो तो भगवा भेस । कहो तो मोतियन मांग भरावा, कहो तो छिटकावा केस । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सुणज्यो बिडद नरेस । ।।२३९।। यह पद विशेष महत्वपूर्ण है । “जिन जिन भेखा म्हारो साहिब रीझै, सोई सोई भेख धारणा”के लिये उतावली मीराँ स्वय ही यह निश्चित नही कर पा रही हैं कि आराध्य को कौन रूप स्वीकृत होगा । “कहो तो मोतियन भगवा भेस ।” सम्भव है कि वैष्णव और नाथ पथ की विभिन्न परम्पराओ के कारण ही ऐसी अभिव्यक्ति हुई हो ।