भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 212

१५४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह मिश्रित भाषा में प्राप्त पद १ म्हाने चाकर राखो जी गिरधारी लाला, चाकर राखोजी। चाकर रहसूँ बाग लगासूँ, नित उठि दरसन पासू। वृन्दावन की कुंज गलिन मे गोविन्द लीला गासूं। चाकरी मे दरसनं पाऊ, सुमिरन पाऊं खरची। भाव भगत जागिरी पाऊं, तीनो बाता सरसी। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, गल वैजन्ती माला। वृन्दावन मे धेनु चरावै, मोहन मुरली वाला। ऊचे ऊचे महल बनाऊं, बिच बिच राखू बारी। सावरिया के दरसन पाऊ, पहिर कुसुम्मी सारी। जोगी आया जोग करन कूँ, तप करने सन्यासी। हरी भजन को साधू आए, वृन्दावन के वासी। मीराँ के प्रभु गहिर गम्भीरा, हृदे रहो जी धीरा। आधी रात प्रभु दरसन दीन्हो, प्रेम नदी के तीरा ॥२४०॥ इस पद की टेक “मीराँ के प्रभु गहिर गम्भीरा” सर्वथा नूतन है। २ मैं तो थारे दामन लागी जी गोपाल। किरपा कीजो दरसन दीजो, सुध लीजो तत्काल। गल बैजन्ती माल बिराजै, दर्शन भई है निहाल। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, भक्तन के रखपाल। ॥२४१॥ पद की तृतीय और चतुर्थ पंक्तियों के द्वितीयार्द्ध विरोधात्मक भावना के द्योतक हैं।