भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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समर्पण द्योतक पद १५७ ५ चितनन्दन आगे नाचूँगी। नाच नाच पिय रसिक रिझाऊ, प्रेमी जन को जाचूँगी। प्रेम प्रीति का बाध घूघरा, ‘सुरत की कछनी काढूँगी। लोक लाज कुल की मरजादा,या मै एक न राखूँगी। पिया के पलगा जा पोढूँगी, मीराँ हरि रग राचूँगी ॥२४६॥ पूर्व पद का पाठान्तर से प्रतीत होते इस पद पर सतमत का प्रभाव विशेष रूपेण स्पष्ट हो जाता है। भाषा पर खड़ी बोली का प्रभाव भी विचारणीय है। प्रथम पंक्ति मे प्रयुक्त ‘चितनन्दन’ के बदले ‘रघुनन्दन’ और द्वितीय पंक्ति मे ‘पिय’ के बदले ‘यदुनाथ जी’ शब्द का भी व्यवहार मिलता है। पाठान्तर १, घूघरू बाध मीराँ नाची रे, पग घूघरूं। लोग कहै मीराँ हो गई बावरी, सास कहै कुलनासी रे। जहर का प्याला राणा जी भेज्या पीवत मीराँ हासी रे। मै तो अपने नारायण की आपही हो गई दासी रे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, बेग मिलो अविनासी रे। ६ मै गिरिधर के घर जाऊ। गिरिधर म्हारो साचो प्रीतम, देखत रूप लुभाऊं। रैन पडे तब हि उठि धाऊ, भोर भये उठि आऊ। रैन दिना वाके सग खेलूँ, ज्यो त्यो ताहि लुभाऊ। जो पहिरावै सोई पहिरू, जो दे सोई खाऊं। मेरी उन की प्रीत पुरानी, उन बिन पल न रहाऊ। जहा बैठावै तित ही बैठूं, बेचै तो बिक जाऊ। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, बार बार बलि जाऊ ॥२४७॥