भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१५८ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह उपर्युक्त पद मे 'म्हारो' (मेरा) और 'धारो', (आपका या तुम्हारा) ये दो शब्द शुद्ध राजस्थानी के है, जब कि शेष पद की भाषा ब्रजभाषा है। परशुराम जी द्वारा सग्रहीत 'पदावली' मे 'उन की', 'पुरानी' आदि के बदले 'उण की' 'पुराणी' आदि का प्रयोग मिलता है, जिससे पद की भाषा पर राजस्थानी प्रभाव और भी स्पष्ट हो उठता है। ७ हरि मेरे जीवन प्राण अधार। और आसिरो नाहि न तुम बिनु, तीनूं लोक मझार। आप बिना मोहि न सुहावं, निरख्यौ सब ससार। मीराँ कहे मै दासी बावरी, दीज्यो मति बिसार ॥२४८॥ ८ निपट बक्ट छबि अटकै मेरे नैना, निपट बक्ट छबि अटके। देखत रूप मदन मोहन को, पियत मयूखन अटके। वारिज भवा अलका टेढी, मनो अति सुगध रस वटके। टेढी कटि टेढी कर मुरली, टेढी पाग लर लटके। मीराँ प्रभु के रुप लुभानी, गिरिधर नागर नटके ॥२४९॥ ९ सखी मेरो कानूड़ो कलेजे कोर। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, कुडल की झकझोर। बिन्द्रावन की कुज गलिन मे, नाचत नन्दकिशोर। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कवल चितचोर। ॥२५०॥