भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह गुजराती में प्राप्त पद १ मुखडानी माया लागी रे मोहन प्यारा। मुखडु मे जोयुँ¹ तारुँ² सर्वजग थार्युँ³ खारु। सब मारु रहूदूँ न्यारु रेयु ससारीडु सुख एवु झाझ बाना नीर जोवुँ⁴, तेरे तुच्छ करी करीए रे। मीराँ बाई बलिहारी, आशा मने तकतारी, हवेँ⁵ हुँ तो बड भागी रे† ।।२५३।।† २ लेह लागी मने तारी, आल्याजी लेह लागी मने तारी। काम काज मुक्युँ⁶ ने धाम ज मुक्युँ, मनमा चाहु छुँ मुरारी। खमे छै काबली हाथ मा छे बासरी, गोकुल मा गायो चारी। सोल सहस्त्र गोपियो ने तमे वरिया, तोय तमे बाल ब्रह्मचारी। मीराँ कहे प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल बलिहारी ।।२५४।।† पद की तीसरी पंक्ति की अभिव्यक्ति शेष पद से सर्वथा भिन्न पड़ती है, “मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर” का प्रयोग भी गुजराती पदो की परम्परा के अनुसार नही है। ३ नागर नन्दा रे बाल मुकुन्दा, छोडी छोने जनना धधा रे, मारी नजरे रहे जो रे नागर नन्दा। ─────── १ देखा, २ तुम्हारा, ३ हो गया, ४ जैसा, ५ अब, ६ छोड दिया।