भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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समरंग द्योतक पद १६१ काम ने काज मने कांई नव सूझे, भूलि गई हूँ मारा घर धंधा रे। आडु अवलुं मे तो कांई नव जोयुं, जोया जोया छे पुनम केरा चंद रे। बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, लागी छे मोहनी मने फदा रे ॥॥२५५॥† ४ राम रमकडू १ जडियो रे रानाजी, मने राम रमकडो जडियो। रुमझुम कर तो मारे मन्दिरे पधारियो, नही कोई याते घडियों रे। मोटा मोटा मुनीजन मथी मथी थाक्या, कोई एक बिरला ने हाथे चुड़ियो रे। सुनु सिखर ना रे घाटती, ऊपर अगम अगोचर नाम पडचुं रे। बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मारु नाम सामलियां सूं जडियो रे। ॥२५६॥† ५ राम सीता पती थारी नेह लागी हो। हो तम्ने भजी थी म्हांरी मीड भागी। घरनो तो धन्ध रे मने नथी गमतौ। साधु सधा ते मारी प्रीत बाधी। काम काज छोड़िया मै तो लोक लाज मेली। प्रेम मगन मा हू राजी। अज्ञान मी कोठड़ी मा ऊध घनी आवै। प्रेम प्रकाश मा हू जागी। दुरजन लोग मारे निन्दा करे छे। वा'ला लागे छै मानो वैरागी। नाची कूदी मे तो भक्ति न कीधीं। लोक नी लाज मै बहू राखी। १ खिलौना। ११