भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १६७ पाठान्तर १; सजन घर आवो जी मीठां बोला¹। बिन देखे मोहे कल न पडत है, कर धर रही कपोला। आवो निसक सक नहि कीजे, हिलमिल के रग घोला। तेरे कारण सब सब रग तजिया, काजल तिलक तमोला। मीराँ दासी जनम जनम की, दिल की घुंडी खोला। पाठान्तर २, साजन घर आवो जी मीठां बोला। कब की ठाढी पथ निहारू, कर धर रही कपोला। तन मन बार हिलमिल के रग घोला। आतुर बिरहनी बिलब नही करना, आयां ही रग रहेला। मीराँ तो गिरधर बिन देख्यां, छिन मासा छिन तोला। ५ राणा जी म्हारी प्रीत पुरबली, मै काई करू। राम नाम बिन घड़ी न सुहावै, राम मिले म्हारा हियरा ठर्याय²। भोजनिया नहि भावै, म्हाने नीदड़ली नही आय। विष को प्यालो भेजियो जी, जावो मीराँ पास। कर चरणामृत पी गई रे, म्हांरे राम जी को विस्वास। विष का प्याला पी गई रे, भजन करै उस ठौर। थारी मारी ना मरू, राखणहार और। छापा तिलक बनाविया जी, मन में निश्चय धार। राम जी काज संवारिया, म्हांने भावे गरदन मार। पेट्या बासक भेजिया जी, यो छै मोतिडारो हार। १ मधुर भाषी, २ ठढा होय