मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ मीरां-बृहद्-पद-संग्रह नाग गले पहरिया, म्हांरे महलां भयो उजार। राठौड़ा री धीहडी जी, सिसोद्यां रे साथ। ले जाती बैकुठ कूँ, म्हांरी नेक न मानी बात। मीराँ दासी राम की जी, राम गरीब निवाज। जन मीराँ को राखज्यो, कोई बांह गहे की लाज। ॥२६४॥ उपर्युक्त पद की कुछ पंक्तिया "विष को प्यालो भेजियो जी म्हांरी नेक न मानी बात" और एक अन्य पद "मीराँ बैठी महल में उठत बैठत राम" की पंक्तियां हूबहू है। इन पंक्तियो की अभिव्यक्ति भी प्रथम तीन पक्तियो की अभिव्यक्ति से सर्वथा भिन्न पड़ती है। इस पद की कुछ पंक्तियो मे निम्नांकित पाठान्तर भी मिलता है। "राम नाम बिन नही भावै, हिवडो झोला खाय" पद की पाचवी पंक्ति मे "राम जी" के बदले "गोविन्द" शब्द का प्रयोग मिलता है। इसी तरह अन्तिम दो पंक्तियो मे भी "राम" के बदले "श्याम" का प्रयोग मिलता है। "मीराँ दासी" और "जन मीराँ" का एक ही साथ प्रयोग इस पद की विशेषता है, जो विचारणीय है। ६ म्हांरा ओलगिया १ घर आज्यो जी। सुख दुख खोलि कहूं अतर की, बेगा २ बदन ३ बताज्यो जी। च्यार पहर च्यारू जुग बीत्या, नैणा नीद न आवै जी। पूरण ब्रह्म अखंड अविनासी, तुम बिन बिरह सतावै जी। नैणा नीर आम ज्यूँ झरण, ज्यूँ मेघ झरण लाया जी। रतवती इत राम कत बिन, फिरत बदन बिलखाया जी। साधू सजन मिलै सिर साटै, तन मन करूं बधाई जी। जन मीराँ नै मिलौ कृपा करि, जनमि जनमि मितराई जी। ॥२६५॥ १ परदेशवासी प्रीयतम, २ शीघ्र, ३ मुख।