मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १८१ करि किरपा प्रतिपाल मो परि, रखो न आपण देस । माला मुद्रा भेखला¹ रे, बाला खप्पर लूँगी हाथ । जोगिण होय जुग ढूँढसूं रे,म्हारा रावलिया² री साथ । सावण आवण कहि गया रे, कर गया कौल अनेक । गिणता गिणता घस गई रे, म्हांरा आंगलियारी रेख । पिव कारण पीली पडी रे, बाला जोबन वाली बेस³ । दास मीराँ राम भजि कै, तन मन कीन्हौ पेस ॥२८७॥ पद की भाषा प्रमुखत राजस्थानी है। परन्तु अधिकाश क्रिया पदो पर खड़ी बोली का प्रभाव स्पष्ट है। सम्भवत गेय परम्परा ही इसके लिये उत्तरदायी हो। ९ जोगिया ने कहियो रे आदेस । आऊँगी मै नाही रहू रे, कर जटाधारी भेस । चीर को फोडू ँ कथा पहिरू, लेऊगी उपदेस । गिणते गिणते घिस गई रे, ऊगलियो की रेख । मुद्रा माला भेखलू, रे खप्पड लेऊ हाथ । जोगिन होय जुग ढूँढसँ रे, रावलिया के साथ । प्राण हमारा वहाँ बसत है, यहाँ तो खाली खोड़ । बात पिता परिवार सूं रे, रही तिनका तोड़ । पाँच पचीसो बस किए, मेरा पल्ला न पकड़े कोय । मीराँ व्याकुल बिरहणी, कोई आय मिलावै मोय ॥२८८॥ इस पद पर खडी बोली का प्रभाव और भी स्पष्ट हो जाता है। उपर्युक्त पाठ की द्वितीय पक्ति के उत्तरार्द्ध मे निम्नाकित पाठ भेद भी मिलता है :-- “कर जोगन को भेस ।” १ पहन लूँ, वेष धारण कर लूँ, २ पति, .३ वयस।