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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१८२ मीराँ-बृहद्-पद-सग्रह १० जोगिया ने कहजो जी आदेस। आऊगी पण नही रहू, बाला, कर जोगिन को भेस। प्राण हमारा वहा बसत है, यहा तो खाली खोड। मात पिता अरु सकल कुटुम्ब सो, रही तिणका ज्यूँ तोड। दड कमडल गूदड़ी रे बाला, कियो नबेलो सनेह। प्रीतम अजहू न आइया, म्हारे योही¹ बडो सनेस²। गुरु को सबद कान मे पहिरू, अग विभूति रमाके। जा कारण मै जगत न जोरै बाला, बालावा रे फसि मै जाके। पाच पचीसूँ बस कर राखूँ, म्हारी पल्ली न पकड़ो कोय। मीराँ व्याकुल विरहणी रे बाला, हरि मिलीया सुख होय ॥२८९॥ उपर्युक्त तीनो पदो के प्रथम अर्द्धाश मे गहरा साम्य हो उठता है। परन्तु जहाँ प्रथम दो पद मे सिर्फ नाथ प्रभाव ही स्पष्ट हो उठता है, वहाँ इस तीसरे पद पर सतमत का ही प्रभाव है। इस पद की भाषा पर खडी बोली का प्रभाव भी अधिक है। ११ राख कमडल गूदडी रे बाला, कियो नेवलो भेष। प्रीतम ओज्यूँ³ नै आइया, यो है बडो अनेस। गुरु को शब्द कान मे पहिरू, अग विभूति रमाय। जा कारण मै जगत तज्यो है, भौरे लागी आय। पाच पचीसा बस करू, पलो न पकडे कोय। मीराँ व्याकुल विरहणी, हरि मिल्या सुख होय ॥२९०॥† यह पद उपर्युक्त तीनो पदो के सम्मिश्रण से बना हुआ गेय रूपा- न्तर प्रतीत होता है। इस पाठ की प्रथम पक्ति विशेष विचारणीय है। १ यही, २ आशका, ३ फिर से अर्थात् लौटकर।