मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १८३ १२ जोगिया जी दरसण दीजंयो आइ। तेरे कारण सकल जग ढूँढया, घर घर अलख जगाइ। खान पान सब फीको लागै, नैणां नीर न माइ१। बहुत दिनां के बिछुरे प्यारे, तुम देख्यां सुख पाइ। मीराँ दासी तुम चरणां की, मिलज्यो कंठ लगाइ ॥२९१॥ ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ सखी मन स्याम सूरत बसी। मुकुट कुडल करन बसी, मंद मुख पर हँसी। बावरी कोऊ कहै मो को, कोई कहै कुलनासी। हस्ती की असवारी२, पाछै लाख कुतिया भुसी। तजियो घूँघट लई गाती, सत देख्या खुसी। सील चोल पहन गल मे, भक्त मारग घुसी। ओस पानी नाहि पियो, छांह बादर किसी। दासि मीराँ लाल गिरधर, प्रेम फंदे फँसी ॥२९२॥ २ पिया अब घर आज्यो मोरे, तुम मेरे३ हू तोरे। मै जन तेरा पथ निहारूं, मारग चितवत तोरे। अवध बदीती अजहूं न आये, दुतियन सूं नेह जोरे। मीराँ कहै प्रभु कब रे मिलोगे, दरसन बिन दोरे४ ॥२९३॥ १ समाय, २ सवारी का राजस्थानी अपभ्रंश, ३ में, ४ दुखमय।