मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १६६ गुजराती में प्राप्त पद १ सूं करु राना जी मारो चितड़ूँ चुरायै मारे मनहु बेधाये । करवा ना सूझे अगने घर नारे काम, भोजन न भावै नैन निद्रा हराम । जल जमनानो काठे ऊभा बलिभद्र वीर, बसरी बजावे वालो जमुना ने तीर । अभी बजारे गजरथ चाल्यो रे आय, स्वान् भसे तो तेनी सख्यान थाय । झख रे मारे रे पेला दुर्जन लोग, चितड़ूँ आटयूँ तो तेनी सिखामन फोक१ । ज्योँ स्यामलयो गिरधारी त्याँ मारी आस, हरिखी निरखी गया मीरा दास। ॥३२२॥† पदभिव्यक्ति मे पूर्वापर संबध का निर्वाह नही हुआ है। २ म्हारे घेरे आवो सुन्दर श्याम, सोले सनगार पेरो शोभता रे । मोतिडे माँग भरावुँ, वेणी गुँथावुँ, शोभे ढलकती हुं२ तो ऊभी राजद्वार । ऊँची हुं चहु ऊभेड़ेरी रे, जोऊ पातलियानी बाट । बेग पधारो म्हांरा ओ साएबा, तारे बेसणे माँटु पाट३ । मोर मुगट शोहामणो रे, गले गुँजा नो हार। मुख मधुरी तारे हो मोरली रे, तारी चालतणी छे बलीहार । दास मीराँ बाई गिरधर नागर, हर्खी निर्खी गुण गाय । कलयुग माँ अये अवतरियाँ४, मने राखोनी चरणे करो साथ ॥३२३॥† पूर्वापर सबंध का निर्वाह इस पद मे भी नही हुआ। पद की अन्तिम पंक्ति प्रामाणिकता के विरुद्ध गवाही देती है। १ व्यर्थ, २ मै, ३ पीढ़ा, ४ मै हम,