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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१६८ मीराँ-वृहद्-पद-सग्रह कह छोडी वह मोहन मुरली, कह छोडी सब गोपी। मूँड मुँडाई डोरि कह बाधी, माथे मोहन टोपी। मातु जसुमति माखन कारन, बाध्यो जाको पांव। श्याम किसोर भये नव गोरा, चैतन्य तांको नांव। पीताम्बर को भाव दिखावै, कटि कोपीन कसे। दास भक्त की दासी मीराँ, रसना कृष्ण रहे। ॥३२१॥ कहा जाता है कि यह पद मीराँ ने महाप्रभु चैतन्य देव को सम्बोधित कर बनाया था। अद्यावधि प्राप्त इतिहास के आधार पर मीराँ चैतन्य देव के समकालीन नही ठहरती। पद की अन्तिम पंक्ति भी विशेष विचारणीय है। पद से व्यक्त होती भावना के आधार पर महा- प्रभु चैतन्य स्वयं ही कृष्ण के अवतार सिद्ध होते है, परन्तु अन्तिम पंक्ति के अनुसार "दास भक्त" सिद्ध होते है। यह "दास भक्त" कौन है? "मीरा दास" नाम से लिखने वाले और इस "दास भक्त" मे भी एक रूपता हो सकती है या नही। यहाँ 'दास' का प्रयोग सभी भक्तो के लिये हुआ है, यह विशेष विचारणीय है। अभिव्यक्ति के आधार पर, मेरे विचार से, "दास भक्त" सम्बोधन किसी विशेष भक्त को ही लक्षित करता है।