भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव प्रभाव द्योतक पद निर्वेदाभिव्यक्ति राजस्थानी में प्राप्त पद १ थोडी थोडी पावो गिरधारी लाल जी, मोली¹ म्हांने आवै²। नदन बन सूं बूटी आई, जोग ध्यान दरसावै। या बूटी दुरलभ देवन के, सेस सहरू मुख गावै। शिव बिरचि जाको ध्यान धरत है, वेद पुरान सुनावै। मीराँ तो गिरधर रग राची, भक्ति पदारथ पावै ॥३२९॥ २ म्हारो मनडो लाग्यो हरि सूं, में अरज करु अतर सूं। माधुरि मूरत पलक न बिसरु, सोले हिरदै धरसूं। आवन कह गये अजहू न आये, बिन दरसण मै तरसूं। म्हारो जनम सुफल हुयो, जा दिन हरि के चरण परसूं। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, तन मन अरपण करसूं ॥३३०॥ पद की तृतीय पंक्ति से वियोग लक्षित होता है। ३ मै थारे गुण रीझी हो रसिक गोपाल। निस बासर मोय आस तिहारी, दरसन द्यो नन्दलाल। १ नशा, २ चढता है।