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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१६ क्रमश - यह आन्दोलन दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर प्रसारित होने लगा। उत्तर भारत मे इसके अग्रगण्य नेता थे रामानन्द, जिन्होने काशी को अपना क्षेत्र बनाया। “भक्ति द्रविड़ उपजी, लाये रामानन्द। प्रकट करी कबीर ने, सप्त दीप नौ खंड।” उत्तरोत्तर वृद्धि को प्राप्त होते हुए इस नवीन आन्दोलन के प्रभाव से स्वजस्थान भी अछूता न रह सका। राजस्थान मे प्रत्येक प्रचलित धर्म को राजाश्रय प्राप्त हुआ तथा विचार-स्वातन्त्र्य का पूर्ण अनुमोदन हुआ। फलत. एकलिंग और भवानी के उपासक गणा-परिवार मे भी महाराणा कुम्भ वैष्णव भक्ति के रग मे रग कर राधा-कृष्ण के प्रेम-गीत गा उठे तो दूसरी ओर “अकबर के गर्व दलनहार और चितोड के जोद्धार" वीर श्रेष्ठ जयमल भी परम वैष्णव सुविख्यात हुए। चितौड की महाराणी झाली ने भी रामानन्द के शिष्य कबीर के गुरुभाई चर्मकार रैदास को अपना गुरु स्वीकार करने मे गौरव का ही अनुभव किया। राजस्थान, इस युग मे प्रवाहित होनेवाली इन तीनो ही विभिन्न धाराओ का सगमराज बना हुआ था। अस्तु, मीराँ की रचना पर भी तीनो ही विभिन्न धाराओ का प्रभाव 'का पाया जाना स्वाभाविक ही सिद्ध होता है। अत्युक्ति न होगी यदि कहा जाय कि मीराँ अपने युग की प्रतिनिधि कवयित्री थी। प्राप्त पदो मे तीनो धाराएँ इतनी स्पष्ट हैं कि इनको बड़ी सरलता से छाँटा जा सकता है। कृष्ण-भक्ति के कारण ही मीराँ की सर्वाधिक ख्याति हुई। अत वैष्णव-परम्परा से प्रभावित पदो पर ही सर्व-प्रथम विचार कर लेना उचित होगा। वैष्णव-परम्परा से प्रभावित पदो को भी दो विभिन्न प्रभेदो मे विभक्त किया जा सकता है। प्रथम समूह उन पदो का है जिनसे निर्वेद की भावना झलकती है। इनमे ससार के सुख और सम्बन्धो को मोह जनित और नश्वर मान कर उनकी ओर से एक गहरी उदासीनता और परमात्मा के शरणा- गत होने पर ही पूर्ण शान्ति और आनन्द की प्राप्ति सम्भव होने की ही अभिव्यक्ति मिलती है। ये पदाभिव्यक्तियाँ अधिकांशतः उपदेशात्मक है। कुछ पदों पर विभिन्न पौराणिक गाथाओ का प्रभाव भी मिलता है। ऐसे पद राजस्थानी, ब्रज मिश्रित राजस्थानी, ब्रज, गुजराती और खडी बोली मे भी पाये जाते हैं। इन पदो मे से अधिकांश की प्रामाणिकता संदिग्ध ही है। खड़ीबोली मे प्राप्त पदो को भाषा के आधार पर निश्चित-

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