मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 261, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २०७ इन्द्र कोप किया ब्रज ऊपर, नख पर गिरिवर धारा । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, जीवन प्राण हमारा । ॥३३३॥† चतुर्वेदी जी के मतानुसार इस पद की प्रामाणिकता भी संदिग्ध ही है, क्योकि शैली मे गहरा अन्तर है। मै भी चतुर्वेदी जी का समर्थन करती हूँ । ६ राणा जी करमारो सगाती१, कुल मे कन्हेंई नही । एक तो मात रे दोय दोय डीकरा, ज्या की न्यारी न्यारी भात२ । (वाकी न्यारी३ न्यारी करमा रेख) । एक तो राजाजी री गद्दी बैठिया, दूजो हलर बैल भर तो पेट । एक तो भाखा रे दोय दोय डीकरी, ज्या की न्यारी न्यारी भात । (वाकी न्यारी न्यारी कामा रेख) । एक तो मोतियन माग भरावती, दूजी घर घर की पनिहार । एक तो गऊ रे दो दो बछड़ा, ज्याकी न्यारी न्यारी राणा भांत । (वाकी न्यारी न्यारी करमां रेख) । एक तो महादेवजी रे मदिर नादियो, दूजो वणजारारे हाथ । एक तो कुम्हार रे दोय दोय मटकिया,ज्याकी न्यारी न्यारी राण भात । (ज्याकी न्यारी न्यारी करमा रेख) । एक महादेव जी रे मदिर जल, चढ़े दूजी चभारा रे हाथ। राणा जी करमां रो सगाती, जग मे कोऊ नही ॥३३४॥† सम्पूर्ण पद मे मीराँ का कही वर्णन नही है। “राणाजी” जैसे सम्बोधन के कारण सम्भवत मीराँ का कहा जा सकता है, परन्तु यह पहलू बहुत हल्का जान पड़ता है। शब्द योजना अन्य पदो के अनुकूल नही पड़ती। पद को प्रक्षिप्त मानना ही अधिक युक्तियुक्त प्रतीत होता है। १ साथी, २ भाँति, तरह, ३ भिन्न भिन्न।