भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २११ १२ सब जग रूठडा, रूठण द्यो, येक राम रूठो नहि पावै । गरभ१ कियौ रतनागर सागर, नीर खारो कर डार्यौ । गरभ कियौ उन चकवा चकवी, रेण बिहोहो२ पार्यौ । गरभ कियौ उन वन की कोयल, रूप स्याम कर डार्यौ । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, हरि के चरण तन वार्यौ॥३४०॥ पद मे पूर्वापर सगति का अभाव है। सम्भवत यह कोई स्वतत्र पद न होकर पद स० ५ की ही कुछ पक्तियो का रूपान्तर है। निर्वेद मिश्रित भाषा में प्राप्त पद १ अरे मै तो ठाढी जपूँ रे राम माला रे। मै तो जपत्ती नांव मेरे सायब का, आण मिलो नन्दलाला रे । हाथ सुमरणी काख कूबडी, ओढ रही मृग छाला रे । मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, ओढे लाल दुसाला रे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, भगतन के प्रतिपाला रे ॥३४१॥ २ ज्याँरा३ चित चरणा से लागा, वे ही सबेरे जागा। पहले भूप भरतरी जागा, शहर उजीणी लागी। सुणा सुणां बचन साहब सतगुरु का गोपीचन्द उठ भाँगा। १ गर्व, २ वियोग, ३ जिनका ।