मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१२ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह साहब सैन बलखारा राजा, बाण बिरहरा लागा। आठ पहर कबीरा जागा, मरण जीवन भय भागा। राणा रूस्या भय मोरे नाही, चित साहब से लागा। मीराँ बाई तो शरणे आया, लोक लाज भय त्यागा ॥३४२॥ पद से सत मत का प्रभाव सुस्पष्ट हो उठता है। ३ माई म्हारे निरधन रो धन राम। खाय न खूटै चोरन लूटै, विपति पड्या आवै काम। दिन दिन प्रीति सवाई दूणी, समरण आगे याम। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कमल बिसराम ॥३४३॥† पाठान्तर १, माई म्हारे निरधन को धन राम। खाय न खूटे, चोर न लूटे, विपत पड् चा आवै काम। दिन दिन प्रीत सवाई दूणी, सुमभरण सूँ म्हारै काम। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरणकमल बिसराम१। उपर्युक्त दोनो पाठ “पायो जी मै तो राम रतन धन पायो” पद के ही गेय रुपान्तर प्रतीत होते है। ४ भजु मन चरण कंवल अविनासी। जेताईँ२ दीसे धरीन गगन बिच, तेताईँ३ सब उठि बासी। कंहो भयो तीरथ व्रत कीन्हे, कहा लिये करवत कासी। „इस देही का गरब न करना, माटी मे मिल जासी। १ विश्राम, २ जितने ही, ३ उतने ही।