भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २१३ यो ससार चहर की बाजी, साझ पड्या उठ जासी । कहा भयो है भगवा पहरया, घर तजि भयो सन्यासी । जोगी होय जुगुति नही जाणी, उलटि जनम फिर आसी । अरज करो अबला कर जोरे, स्याम तुम्हारी दासी । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम की फांसी ॥३४४॥ उपर्युक्त पद पर सत मत का प्रभाव सुस्पष्ट है । ५ लगे रहना, लगे रहना, हरी भजन मे लगे रहना । साहेब का घर दूर है रे, जैसी लगी खजूर । चढै तो चाखे प्रेम रस, पडे तो चकना चूर । क्या बक्तर का पहनना रे, क्या ढालो की ओट । सूरे पूरे का पारखा रे, लडी घणी से जोर । कान्ह कटारी बडी रे गुरु गोविन्द तलवार । धनुष्य रूपी माला बाध वो, कबू न लागे द्वार । हाड चाम की देह बनी रे, नव नाड़ी दश कोर । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, लगी भर्म की चोट ॥३४५॥† पद की पहली तीन और अतिम दो पक्तियो से सतमत का प्रभाव स्पष्ट स्पष्ट हो उठता है। पद का मध्याश अर्थहीन है। ऐसे पदो की प्रामाणिकता मे सदेह का होना सहज है । ६ भजन भरोसे अविनासी, मै तो भजन भरोसे । जप तप तीरथ कछूए न जाणूँ, करत मे उदासी रे । मत्र न जत्र कछुए न जाणूँ, वेद पढ़चो न गई कांसी । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरणकवल की हूँ दासी ॥३४६॥