मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ७ भजन बिना जिवडा दु खी, मन तू राम भजन करी ले। जीव तूँ जायगा जरूरू मन तू राम भजन करीले। लाख रे चौर्यासी फेरा फिरोगे, जीव जन्मी जन्मी भरे। माता पिता तेरा दास ने¹ बन्धु वाल्हे, कारज कछु ना सरे। हस्ती ने घोडा माल खजाना, धन भडार भर्यो घर मे। बाइ मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, अरे मेरो चित भजन मे धरे। ।।३४७।। उपर्युक्त पद की भाषा पर गुजराती प्रभाव 'वाल्हे' आदि स्पष्ट है। ८ तुम सुनो दयाल म्हांरी अरजी। भौ² सागर मे बही जात हूँ, काढो तो थारी मरजी। यो ससार सगो नही कोई, साचां रघुवर जी। मात पिता और कुटुम्ब कबीला, सब मतलब के गरजी। मीराँ की प्रभु अरजी सुन लो,चरन लगाओ थांरी मरजी।।३४८।। ९ जग मे जीवणा थोड़ा रे, राम कुण करे जजार। मात पिता तो जन्म दियो है, करम दियो करतार। कई रे खायो कइ रे खरचियो, कइ रे कियो उपकार। दिया लिया तेरे सग चलेगा, और नही तेरी लार³। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, भज उतरो भव पार ।।३४९।। १ गुजराती शब्द जिसका अर्थ है 'और', २ भव, ३ पीछे।